Board Results 2024 does teachers who check copies do not teach what is the process how teachers are selected

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Board Exam Copy Checking Process: आजकल बोर्ड परीक्षाओं का मौसम चल रहा है. कई बोर्ड्स के एग्जाम जहां खत्म हो चुके हैं तो कई के अभी भी चल रहे हैं. बिहार बोर्ड की कॉपी जांचने का काम खत्म हो चुका है तो यूपी बोर्ड का शुरू हुआ है. ऐसे में कई बार मन में ये सवाल उठता है कि ये काम किस प्रकार होता है, कौन से टीचर्स कॉपी जांचते हैं, क्या वो क्लास नहीं लेते? अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल आते हैं तो जानते हैं इनके जवाब.

क्लास लेते हैं ये टीचर

बोर्ड परीक्षाओं की कॉपी जांचने वाले शिक्षक स्कूलों से ही होते हैं और ये पढ़ाते भी हैं. एग्जाम खत्म हो जाने के बाद इनकी ड्यूटी कॉपी जांचने में लगती है और स्कूल के रेग्लूयर काम के अलावा ये कॉपी जांचने का काम भी करते हैं. आमतौर पर जब स्कूल की छुट्टियां हो जाती हैं उस समय पर ही कॉपी जांचने का काम शुरू होता है. ऐसे में जो टीचर इस काम के लिए चुने जाते हैं, वे केंद्र जाकर कॉप जांचते हैं और बाकियों की छुट्टी रहती है.

अनुभवी टीचर चुने जाते हैं

इस काम के लिए अनुभवी और योग्य टीचर चुने जाते हैं. इन्हें बोर्ड द्वारा तय सेंटर्स पर जाकर कॉपी जांचने का काम करना होता है. इसके लिए इन्हें प्रति कॉपी के हिसाब से कुछ भुगतान किया जाता है. ये नियम हर बोर्ड का अलग होता है. पहले यूपी बोर्ड में दो साल से कम अनुभव वाले टीचर कॉपी जांचने का काम नहीं करते थे पर पिछले साल ये नियम भी बदल गया. इस मामले में सभी बोर्ड के नियम फर्क होते हैं पर मोटे तौर पर पीजीटी, टीजीटी अनुभवी टीचर ही इस कम के लिए चुने जाते हैं.

कैसे आगे बढ़ता है प्रोसेस

हर सेंटर में टीचर्स के अलावा एडिशनल एग्जामिनर और हेड एग्जामिनर नियुक्त होता है जिनकी देखरेख में कॉपी चेकिंक का काम होता है. कॉपी का पहला पन्ना जिसमें नाम और रोल नंबर होता है, वो हटा दिया जाता है और एक सीक्रेट कोड दे दिया जाता है. इससे टीचर नहीं जान पाते कि वे किसकी कॉपी चेक कर रहे हैं. आमतौर पर दूसरे स्कूल के बच्चों की कॉपियां चेक करने को मिलती हैं.

तय होती है मार्किंग स्कीम

सीबीएसई बोर्ड में ऐसा होता है कि पहले एक स्पेसिमेन कॉपी दी जाती है जिसे तीन टीचर चेक करते हैं और मार्क्स देते हैं. फिर हेड एग्जामिनर तीनों को देखकर तय करता है कि नंबर किस प्रकार देने हैं. एक जनरल गाइडलाइन तय हो जाती है और उसी के अनुरूप कॉपी चेकिंग का काम शुरू होता है. ज्यादातर जगहों पर लीनिएंट मार्किंग करने के ही निर्देश होते हैं.

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