बिना इजाजत हायर एजुकेशन हासिल करने पर हुआ था डिमोशन, हाई कोर्ट ने तीन शिक्षकों को दी बड़ी राहत


<p style="text-align: justify;">अपने आला अधिकारियों से इजाजत लिए बिना हायर एजुकेशन के लिए कदम बढ़ाना तीन प्राइमरी टीचर्स को भारी पड़ गया था. तीनों ने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री के लिए परमिशन नहीं ली थी. सजा के तौर पर तीनों का प्रमोशन भी रोक दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया. मसला गुजरात के भावनगर शहर का है. अब इस मामले में अदालत ने तीनों शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए उनके प्रमोशन पर लगी रोक हटाने का आदेश दिया है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>यह है पूरा मामला</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">गुजरात के भावनगर शहर में नगर पालिका बोर्ड के स्कूल में मगन डोडिया, सावजी परमार और हरेश राजगुरु ने 1980 से 1990 के दौरान सेवाएं दी थीं. उस वक्त प्राइमरी टीचर की पोस्ट के लिए जरूरी योग्यता प्राइमरी टीचिंग में सर्टिफिकेट कोर्स के साथ सिर्फ सेकेंडरी स्कूलिंग थी. कुछ समय बाद राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव किया और प्रमोशन के लिए मानक तय कर दिए. ऐसे में तीनों ने हेड टीचर बनने के लिए जरूरी हेड टीचर्स एप्टीट्यूड टेस्ट (HTAT) क्लियर कर लिया और 2012 के दौरान उन्हें प्रमोट कर दिया गया.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>2023 में लगा तगड़ा झटका</strong></h3>
<p style="text-align: justify;"><a title="साल 2023" href="https://www.abplive.com/topic/new-year-2023" data-type="interlinkingkeywords">साल 2023</a> इन तीनों शिक्षकों के लिए काफी भारी रहा. दरअसल, 8 दिसंबर 2023 के दिन भावनगर टाउन एजुकेशन कमेटी ने तीनों का प्रमोशन रद्द कर दिया और उन्हें उनकी वास्तविक पोस्ट प्राइमरी टीचर पर डिमोट कर दिया. तीनों को यह सजा विभाग की इजाजत लिए बिना हायर एजुकेशन हासिल करने के चलते दी गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>तीनों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद तीनों ने गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि तीनों शिक्षकों ने हायर स्टडी करने के लिए इजाजत मांगी थी, लेकिन अथॉरिटी ने डोडिया और परमार की अर्जी पर कोई सुनवाई नहीं की. 1988 में राजगुरु को ग्रेजुएशन करने की इजाजत दे दी गई थी. वहीं, 2010 के दौरान उन्होंने मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी. ऐसे में राजगुरु को भी सजा दी गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>अदालत ने सुनाया यह फैसला</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">जस्टिस निखिल करेल की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और तीनों शिक्षकों डोडिया, परमार और राजगुरु को बतौर हेड टीचर जॉब करने का आदेश दिया. अदालत ने इस मामले में संबंधित अथॉरिटी को नोटिस भी जारी किया है.</p>
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